जयशंकर और खलीलुर रहमान की मुलाकात: भारत-बांग्लादेश रिश्तों में नई शुरुआत

जयशंकर और खलीलुर रहमान की मुलाकात: भारत-बांग्लादेश रिश्तों में नई शुरुआत

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉ. खलीलुर रहमान ने बुधवार, 9 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में एक अहम मुलाकात की। इस बैठक का मकसद करीब 18 महीनों से जारी कूटनीतिक तनाव को खत्म कर दोनों देशों के रिश्तों को एक नई दिशा देना है। बैठक में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायून কবির भी मौजूद थे, जिससे इस चर्चा की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

हकीकत यह है कि अगस्त 2024 में बांग्लादेश में सरकार बदलने के बाद से दोनों देशों के बीच रिश्तों में काफी उतार-चढ़ाव आया था। शेख हसीना की सरकार गिरने और मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार आने के बाद तनाव इतना बढ़ गया था कि बातचीत के रास्ते लगभग बंद हो गए थे। लेकिन 17 फरवरी 2026 को एक मोड़ आया, जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और विदेश सचिव विक्रम मिस्री, तारीक रहमान के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने बांग्लादेश गए। यहीं से बर्फ पिघलनी शुरू हुई और अब यह मुलाकात उसी प्रक्रिया का हिस्सा है।

तनावपूर्ण मुद्दों पर चर्चा और प्रत्यर्पण की मांग

बुधवार दोपहर को हुई इस बैठक में वीजा सुविधाओं, ऊर्जा सहयोग और प्रत्यर्पण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर बात हुई। बांग्लादेशी पक्ष ने एक बार फिर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुজ্জামান खान कमाल को वापस सौंपने (प्रत्यर्पण) की मांग की। दिलचस्प बात यह है कि भारत ने इस मांग पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। यह खामोशी संकेत देती है कि भारत इस मुद्दे पर जल्दबाजी करने के मूड में नहीं है और कानूनी प्रक्रियाओं को प्राथमिकता दे रहा है।

वहीं, खलीलुर रहमान ने स्पष्ट किया कि बांग्लादेश नेशनल पार्टी (BNP) की सरकार अपनी विदेश नीति में "बांग्लादेश फर्स्ट" के सिद्धांत पर चलेगी। इसका सीधा मतलब यह है कि आपसी विश्वास और सम्मान तो रहेगा, लेकिन बांग्लादेश अपने राष्ट्रीय हितों को सबसे ऊपर रखेगा।

ऊर्जा और सुरक्षा पर विशेष जोर

बातचीत सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रही। बांग्लादेश ने भारत से डीजल और उर्वरकों (fertilizers) की आपूर्ति बढ़ाने का अनुरोध किया है। इसके अलावा, एक सकारात्मक पहलू यह रहा कि रहमान ने छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के आरोपियों को पकड़ने में भारत की मदद के लिए शुक्रिया अदा किया। यह दिखाता है कि सुरक्षा मामलों में दोनों देशों के बीच समन्वय अब पटरी पर लौट रहा है।

इस दौरे की शुरुआत मंगलवार, 8 अप्रैल 2026 को हुई थी, जब राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल ने रहमान की मेजबानी की। उस डिनर मीटिंग में रणनीतिक सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर लंबी चर्चा हुई। इसके बाद बुधवार को उन्होंने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी से भी मुलाकात की, ताकि ऊर्जा क्षेत्र में नए समझौतों की राह तलाशी जा सके।

भविष्य की राह और रणनीतिक महत्व

विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि भारत बांग्लादेश की नई सरकार के साथ सकारात्मक रूप से जुड़ने के लिए तैयार है। दोनों पक्षों ने सहमति जताई कि अब समय है कि द्विपक्षीय तंत्रों (bilateral mechanisms) को और मजबूत किया जाए और सहयोग के नए रास्तों की खोज की जाए।

यह दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि इसके तुरंत बाद 10 से 12 अप्रैल 2026 तक मॉरीशस में 'इंडियन ओशन कॉन्फ्रेंस' होने जा रही है, जिसमें रहमान शामिल होंगे। यानी दिल्ली से सीधे मॉरीशस जाने का यह कार्यक्रम एक सोची-समझी कूटनीतिक चाल है, जिससे दक्षिण एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता का संदेश जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुलाकात महज एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि एक "रीसेट बटन" की तरह है। 18 महीने का सन्नाटा अब खत्म हो रहा है और आने वाले समय में कई उच्च स्तरीय बैठकें होने वाली हैं, जो व्यापार और सुरक्षा के नए आयाम तय करेंगी।

मुख्य तथ्य एक नज़र में

मुख्य तथ्य एक नज़र में

  • दौरे की अवधि: 8 से 10 अप्रैल 2026
  • प्रमुख मांगें: शेख हसीना का प्रत्यर्पण और डीजल/उर्वरक की अधिक आपूर्ति
  • नीतिगत बदलाव: बांग्लादेश की नई "बांग्लादेश फर्स्ट" विदेश नीति
  • महत्वपूर्ण घटना: फरवरी 2026 में तारीख रहमान का प्रधानमंत्री बनना
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव क्यों बढ़ा था?

अगस्त 2024 में बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन हुआ, जहाँ शेख हसीना की सरकार गिरी और मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार आई। इस राजनीतिक उथल-पुथल और उसके बाद की परिस्थितियों के कारण करीब 18 महीनों तक दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्तों में कड़वाहट और तनाव रहा था।

"बांग्लादेश फर्स्ट" नीति का क्या मतलब है?

तारीक रहमान की BNP सरकार द्वारा अपनाई गई यह नीति संकेत देती है कि बांग्लादेश अब अपनी विदेश नीति में अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखेगा। हालांकि यह नीति आपसी सम्मान और विश्वास पर आधारित है, लेकिन यह स्पष्ट करती है कि बांग्लादेश अपनी शर्तों और जरूरतों के अनुसार कूटनीतिक संबंध तय करेगा।

क्या भारत ने शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग मान ली है?

नहीं, विदेश मंत्री खलीलुर रहमान द्वारा प्रत्यर्पण का अनुरोध किए जाने के बावजूद भारत ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। भारत आमतौर पर प्रत्यर्पण मामलों में कानूनी प्रक्रियाओं और द्विपक्षीय संधियों का पालन करता है, इसलिए इस पर अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं आया है।

इस दौरे का ऊर्जा क्षेत्र पर क्या असर पड़ेगा?

बांग्लादेश ने डीजल और उर्वरक की आपूर्ति बढ़ाने का अनुरोध किया है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के साथ हुई मुलाकात के बाद उम्मीद है कि दोनों देश ऊर्जा सुरक्षा के लिए नए समझौतों पर काम करेंगे, जिससे बांग्लादेश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में भारत की मदद मिलेगी।