लोकसभा सीटें 543 से 816 होंगी, महिलाओं को मिलेगा 33% आरक्षण
संसद के मौजूदा बजट सत्र में बड़े बदलाव होने वाले हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या वे इसी सत्र में पास होंगे। अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री ने हाल ही में बताया है कि महिला आरक्षण कानून में संशोधन के लिए सरकार पूरी तरह तैयार है। सबसे बड़ी खबर तो यह है कि लोकसभा की कुल सीटें वर्तमान 543 से बढ़ाकर 816 की जानी हैं। इनमें से 273 सीटें सीधे महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
यह सिर्फ एक आंकड़ों का खेल नहीं है। जब यह कानून पास होगा, तो हमारे देश के नीचे की धुरियों को भी सीधा लाभ मिलेगा। सुना रहा है कि इससे अगली जनगणना के इंतज़ार की जरूरत नहीं पड़ेगी। सरकार अब 2011 की जनगणना का आधार बनाएंगी।
राजनीतिक समीकरण और आम सहमति की कहानी
सच तो यह है कि संविधान में इतना बड़ा बदलाव बिना विपक्ष की मंजूरी के मुश्किल है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं के बाद, गृह मंत्री ने वाईएसआर कांग्रेस और बीजेडी के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की। सोमवार की बैठक में कुछ प्रगति हुई, लेकिन मुख्य विरोधी दलों से बातचीत अभी बाकी है।
कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने इस परामर्श में शामिल होने से हिचकिचाहट दिखाई है। उनका कहना है कि पहले सर्वदलीय बैठक होनी चाहिए। सरकार की तरफ से कहा गया है कि वे अपनी ओर से जो भी जानकारी दे सकते हैं देने को तैयार हैं। हालाँकि, अभी तक कोई औपचारिक सहमति देखने को नहीं मिली है। विपक्ष का दबाव कम हो रहा है क्योंकि उन्हें लगता है कि सरकार इसे तेजी से ढुलाई नहीं ला सकती।
परिसीमन और 2029 की समयरेखा
यहाँ एक रोचक मोड़ है। नया बिल अगर पास हुआ, तो लोकसभा और विधानसभाओं की सीटों का पुनर्विन्यास होगा। सरकार चाहती है कि ये सब 31 मार्च 2029 तक तय हो जाए। इस ताजा फैसले से राज्य चुनावों को भी फायदा होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के प्रावधान जल्दी लागू हुए, तो 2024 के बाद होने वाले कई विधानसभा चुनावों में इसका असर दिखेगा। जैसे कि ओडिशा, आंध्र प्रदेश और सिक्किम में होने वाले चुनावों में यह नियम काम आ सकता है।
2023 के संशोधन पर फिर से चर्चा
अगर आप थोड़ा पीछे देखें, तो 2023 में संसद ने पहले ही संविधान का 106वां संशोधन पास किया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उस सन् 2023 में स्वीकृति दी थी। लेकिन वहां एक शर्त थी—उसका लागू होना परिसीमन अभ्यास पर टिका था। अब सरकार वह शर्त को छोड़ने या बदलने की सोच रही है।
बजट सत्र में यह विधेयक लाने की उम्मीद थी। लेकिन सूत्रों के मुताबिक, संभावना बहुत कम हो गई है। इंडिया ब्लॉक ने जोर लगा रखा है। इस कारण सरकार ने अपने एजेंडे को थोड़ा स्थगित करना पड़ा।
विपक्ष की मांग और भविष्य की चुनौतियां
विरोधी दल कह रहे हैं कि महिलाओं का अधिकार तो बेशक बढ़ेगा, लेकिन इसका असर छोटे राज्यों की सीटों पर भी पड़ सकता है। अगर 2011 की जनगणना का डेटा यूज़ हुआ, तो कुछ राज्यों की सीटों की संख्या घट सकती है। इसीलिए उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र जैसे राज्यों की सावधानी बरतनी पड़ सकती है।
सरकार ने दो नए विधेयकों का ऐलान किया है—one constitutional amendment और दूसरा सामान्य कानून। यदि संसद से मंजूरी मिली, तो यह एक बड़ा हासिल होगा। फिर भी, इस सत्र में बिल पारित होने की आशा अभी ज्यादा नहीं बची। सत्रावसान की बजाय, संसद को स्थगित (adjourned) करने की योजना बन रही है ताकि अगले महीने विधानसभा चुनावों के बाद इसे फिर से बुला सकें।
Frequently Asked Questions
महिला आरक्षण का प्रभाव कब से शुरू होगा?
यदि संसद विधेयक को मंजूरी देती है, तो यह प्रावधान 31 मार्च 2029 से लागू हो सकता है। इससे अगले लोकसभा चुनावों और कुछ राज्यों की विधानसभा चुनावों में सीधे लाभ मिलेगा।
क्या सभी राज्यों की लोकसभा सीटें बढ़ेंगी?
कुल सीटें 543 से 816 होंगी, लेकिन इनमें वृद्धि केवल महिला आरक्षण के आधार पर होगी। अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए पहले से मौजूदा कोटा को बदला नहीं जाएगा।
विपक्ष इस मुद्दे पर क्या सोच रहा है?
कांग्रेस और टीएमसी सहित विपक्षी दल सर्वदलीय बैठक की मांग कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर विस्तृत चर्चा होना चाहिए।
क्या यह कानून 2024 चुनावों में लागू होगा?
नहीं, 2024 के चुनावों में यह तुरंत लागू नहीं होगा। इसे लागू करने के लिए 2029 तक का समय दिया गया है, जिसके लिए परिसीमन कार्य पूर्ण होना अनिवार्य है।
Vikram S
मार्च 26, 2026 AT 18:34यह बिल्कुल भी सही कदम नहीं है। राजनीतिक गणित का खेल इससे और खराब हो गया है। लोगों को यह समझ में ही नहीं आता कि सीटें बढ़ाने से क्या फायदा होगा। वोट बैंक के इरादे स्पष्ट हैं। असली सुधार तो विकास की जरूरत होती है। महिलाओं का कल्याण चारों तरफ होने चाहिए। लेकिन पॉपुलिज्म इसे अंधेरे में ले जाएगा। हमने पहले कई बार ऐसे वादे सुने हैं। अब फिर वही दृश्य तैयार है। समाचार पत्रों पर भरोसा करना मुश्किल होता है। जनता सोच रही होगी कि उन्हें धोखा हुआ। यह प्रक्रिया लंबी अवधि तक चल सकती है। उम्मीदें टूट जाती हैं जब बात संसद की आती है। किसी ने गणना की बात नहीं कर रहा। नीति निर्माता गंभीर होने चाहिए। यह सब दिखावे जैसा लग रहा है।
nithin shetty
मार्च 28, 2026 AT 18:012011 ki sensus data se fayda nahi hoga abhi. population grow hue hai. log bhul gaye honge. naya plan chahiye tha. purane numbers par depend mat karo.
Ganesh Dhenu
मार्च 28, 2026 AT 20:09संविधान केवल एक कागज नहीं है। समाज को इसका लाभ मिलना चाहिए। लेकिन शर्तें स्पष्ट होनी चाहिए। स्थिरता बनाए रखना सबसे प्राथमिकता है। हमारा ध्यान विकास की ओर होना चाहिए। यह सुधर के लिए अच्छा मौका है।
Mona Elhoby
मार्च 30, 2026 AT 20:00are wah kitni bahadur ban gayi sarkar. par ye sab kaise implement hogayega. log apne ghar me khane ke liye paani ki dhoond rahe hai aur wo seat baate kar rahi ha. fake neam pe asli chala jati hai. women empowerment ka matlab sirf ticket milna nahi hota. yeh sab theater lagta hai mujhe. politics mein sab kuch phirta rehta hai. main bas dekhti rahungi ki kya nikalta hai. hope kam hai mere me. main sachchai nahi dekh paa rahi hu.
Arjun Kumar
मार्च 31, 2026 AT 06:24मुझे लगता है optimism rakhna chahiye. aap sahi keh rahi ho ki kaam bhi zaroori hai. par direction sahi hai. hum support karenge. negativity se kuch nahi hoga. sabmil kr chalo.
RAJA SONAR
अप्रैल 1, 2026 AT 07:21816 seats ka drama abhi shuru hua hai.
Mukesh Kumar
अप्रैल 2, 2026 AT 22:58yeh bahut bada step hai. humein usse appreciate karna chahiye. women power badhni chahiye. development ke liye zidd lena padega. hum sab ke liye achha hai. muje lagta hai ye best decision hai. forward moving India. cheers.
Shraddhaa Dwivedi
अप्रैल 4, 2026 AT 15:30yes absolutely. aapka vichar bahut positive hai. humein saath milna chahiye. constructive criticism bhi zaroori hai. par support dena banta hai. sab mil kar chalega. thank u.
Govind Vishwakarma
अप्रैल 6, 2026 AT 13:26kuch nahi change hoga. same old same old. corruption badhegi. trust broken hai. log chup rahenge. system corrupt hai. koi solution nahi hai. pure time waste.
Jamal Baksh
अप्रैल 6, 2026 AT 17:34इस कदम का मूल्यांकन विस्तृत रूप से किया जाना चाहिए। संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। राज्य सरकारों की सहमति अनिवार्य है। यदि नियम मानकों के अनुसार लागू होंगे तो लाभकारी साबित होगा। विकास के लिए यह एक मांग थी। हमें सकारात्मक राह पर चिन्हित करने की आवश्यकता है।
Saileswar Mahakud
अप्रैल 7, 2026 AT 09:35ji bilkul sahi kah rahe ho. rules follow karni chahiye. respect bhi zaroori hai. calm discussions se kaam banega. hum sunne wali culture rakhte hain. thanks for sharing. sab achha rahega.
Rakesh Pandey
अप्रैल 8, 2026 AT 15:12bas time dekhne do. jo hoga wo hoga. hum normal life jeete raho. politics unko chodkar chode. kuch nahi kar sakte hum. result dekhte rahunga. tension free rehna chahiye
aneet dhoka
अप्रैल 10, 2026 AT 12:28logon ko nahi bataya gaya. yehi asli bakchadi hai. media silence kyu hai. kuch toh gadbad hai. background me plans chal rahe hai. hum blind hain. watch carefully. nothing is simple. trust no one.