फारूक अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री पर गांधी के प्रति अज्ञानता का आरोप लगाया

फारूक अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री पर गांधी के प्रति अज्ञानता का आरोप लगाया

फारूक अब्दुल्ला का प्रधान मंत्री पर आरोप

नेशनल कांफ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महात्मा गांधी पर की गई टिप्पणियों को 'चौंकाने वाला' बताया है। अब्दुल्ला का कहना है कि गुजरात से दोनों भाजपा नेता होने के बावजूद, मोदी महात्मा गांधी की प्रशंसा करने में संकोच कर रहे हैं। इसे लेकर उन्होंने पीएम की कड़ी आलोचना की।

फारूक अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया कि महात्मा गांधी ने न केवल भारत की स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, बल्कि विश्वभर के महान राजनेताओं को भी प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि नेल्सन मंडेला और मार्टिन लूथर किंग जूनियर जैसे नेता गांधी के सिद्धांतों से प्रभावित थे।

अमित शाह की घोषणा पर भी जताई आपत्ति

अमित शाह की घोषणा पर भी जताई आपत्ति

इसके साथ ही फारूक अब्दुल्ला ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा जम्मू और कश्मीर में आतंकवादियों और पत्थरबाजों के रिश्तेदारों को सरकारी नौकरियों से वंचित करने की घोषणा पर आपत्ति जताई। उनका मानना है कि इससे लोगों और केंद्र सरकार के बीच की दूरी और बढ़ेगी।

उन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल अनुपयुक्त है बल्कि संवैधानिक अधिकारों के विपरीत भी है। अब्दुल्ला ने कहा कि इस तरह के निर्णयों से जम्मू और कश्मीर में स्थिति और अधिक कठिन हो जाएगी, जिसका प्रभाव शांति और सौहार्द पर पड़ेगा।

पीडीपी प्रमुख मेहबूबा मुफ्ती का समर्थन

फारूक अब्दुल्ला ने पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष मेहबूबा मुफ्ती का भी समर्थन किया, जिनके खिलाफ कथित तौर पर आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने के लिए एफआईआर दर्ज की गई है। अब्दुल्ला ने कहा कि यह राजनीतिक दमन का एक और उदाहरण है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दमन के इस दौर में एकता बनाये रखना आवश्यक है।

राफाह में हवाई हमलों पर अंतर्राष्ट्रीय मौन

राफाह में हवाई हमलों पर अंतर्राष्ट्रीय मौन

फारूक अब्दुल्ला ने एक और महत्वपूर्ण मुद्दे पर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने राफाह में हुए हवाई हमलों की निंदा करते हुए अंतर्राष्ट्रीय मौन को 'अस्वीकार्य' बताया। अब्दुल्ला ने कहा कि इस मुद्दे पर विश्व समुदाय को कड़े कदम उठाने चाहिए और इज़राइल के खिलाफ ठोस कार्रवाई करनी चाहिए।

अब्दुल्ला ने कहा कि इस तरह का अंतर्राष्ट्रीय मौन कई मासूम नागरिकों की जान को खतरे में डालता है और इसे गंवारा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों का उल्लंघन किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।

निष्कर्ष

इन सभी मामलों पर अपने विचार व्यक्त करते हुए फारूक अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया कि जब तक वर्तमान केंद्र सरकार इन सभी मुद्दों पर संवेदनशील दृष्टिकोण नहीं अपनाती, तब तक देश में शांति और सौहार्द बनाये रखना कठिन हो सकता है। उन्होंने जोर दिया कि सभी नागरिकों को समान अधिकार और सम्मान मिलना चाहिए, चाहे वे किसी भी क्षेत्र या समुदाय से आते हों।

कुल मिलाकर, फारूक अब्दुल्ला ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी राय व्यक्त की और केंद्र सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सही नीतियों और दृष्टिकोण के माध्यम से ही देश को प्रगति और शांति की ओर ले जाया जा सकता है।

19 टिप्पणि

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    Shubh Sawant

    जून 1, 2024 AT 22:19

    गांधी को याद करना तो अच्छी बात है लेकिन उनके नाम पर राजनीति करना बेकार है। मोदी जी ने जो किया है वो किसी के विचारों से नहीं बल्कि देश की जरूरतों से है।

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    Adarsh Kumar

    जून 2, 2024 AT 07:41

    अब्दुल्ला जैसे लोग गांधी का नाम लेकर देश को बांटने की कोशिश कर रहे हैं। ये सब बातें बस चुनावी चाल हैं। जो देश की अर्थव्यवस्था को तबाह कर रहे हैं वो गांधी के नाम पर रो रहे हैं। क्या गांधी जी भी अब अपने आप को फंसा रहे होंगे? 😏

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    Parmar Nilesh

    जून 2, 2024 AT 10:29

    महात्मा गांधी का विचार तो अमर है लेकिन उनके नाम पर जो आज राजनीति हो रही है वो उनके सिद्धांतों के खिलाफ है। आज का भारत उनके विचारों के बजाय उनकी विरासत का दुरुपयोग कर रहा है। गांधी ने अहिंसा की बात की थी, न कि अहिंसा के नाम पर बदला लेने की।

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    Atul Panchal

    जून 2, 2024 AT 11:14

    अब्दुल्ला का ये सारा बहाना बस एक ट्रेंडिंग टॉपिक बनाने के लिए है। उनके जैसे लोग जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को लीगलाइज़ करने की कोशिश कर रहे हैं। गांधी के नाम पर राजनीति करने की बजाय पहले अपने राज्य में शांति बनाएं।

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    Shivakumar Lakshminarayana

    जून 2, 2024 AT 13:39

    राफाह पर हमले पर अंतर्राष्ट्रीय मौन? ये सब बकवास है। जब भारत के बारे में बात होती है तो ये लोग चुप रहते हैं। अब जब किसी दूसरे देश की बात आती है तो वो आवाज़ उठाने लगे। ये दोहरा मापदंड है।

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    Anjali Akolkar

    जून 3, 2024 AT 09:32

    हम सबको एक दूसरे के लिए थोड़ा सहनशील बनना चाहिए। गांधी जी ने भी यही सिखाया। 😊

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    Arman Ebrahimpour

    जून 3, 2024 AT 12:54

    मोदी जी को गांधी के बारे में बात करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने तो भारत को दुनिया के सामने खड़ा किया है। अब्दुल्ला के पास तो बस राजनीतिक गुस्सा है। ये लोग अपने नाम के लिए हर चीज़ को उलट देते हैं।

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    Sri Lakshmi Narasimha band

    जून 4, 2024 AT 19:54

    गांधी जी के बिना आज का भारत नहीं होता... लेकिन आज का भारत गांधी जी के समय का नहीं है 😅 दोनों को अलग-अलग तरीके से समझो।

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    Patel Sonu

    जून 6, 2024 AT 14:56

    गांधी के नाम पर जो भी राजनीति हो रही है वो उनके विचारों से दूर है। आज के युवा जो देश को बदल रहे हैं वो गांधी जी के नाम पर नहीं बल्कि उनकी विरासत के आधार पर काम कर रहे हैं। अब्दुल्ला जैसे लोग अपने जमाने के विचारों को आज के भारत में लाने की कोशिश कर रहे हैं।

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    srinivas Muchkoor

    जून 7, 2024 AT 18:08

    गांधी जी को याद करना अच्छा है पर उनकी बातों को अपनाना नहीं। आज के दौर में अहिंसा का मतलब बस डरना है।

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    Puneet Khushwani

    जून 9, 2024 AT 04:39

    बस गांधी का नाम ले लो और चलो।

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    SRI KANDI

    जून 9, 2024 AT 15:18

    क्या हम सब इतने जल्दी आपस में लड़ रहे हैं? कुछ तो अच्छा भी है ना? 😔

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    Ananth SePi

    जून 11, 2024 AT 03:49

    महात्मा गांधी का जीवन एक अद्भुत अध्याय है जिसमें अहिंसा, सत्य और सेवा का संगम है। आज के युग में जब हम डिजिटल राजनीति, ट्रोलिंग और फेक न्यूज़ के बीच खो रहे हैं, तो गांधी की शांति की शिक्षा एक आध्यात्मिक रिफ्रेशर है। उन्होंने जिस तरह से अपने जीवन को साधना बना लिया, वह आज के राजनेताओं के लिए एक अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कभी बड़े भाषण नहीं दिए, बल्कि अपने जीवन से देश को बदला। आज के नेता जो ट्वीट करके राष्ट्रीय नीति बनाने की कोशिश करते हैं, उन्हें एक बार गांधी के दिनचर्या को देखना चाहिए। वो दिन में सात बार नमाज़ पढ़ते थे, अपने हाथों से चाकलेट बनाते थे, और अपने आसपास के गांवों में घूमते थे। आज के नेता तो अपने एयरकूलर्ड कार में बैठे ट्विटर पर लिखते हैं। क्या यही हमारा भविष्य है? या हम अपनी जड़ों को फिर से ढूंढ सकते हैं? 🤔

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    sagar patare

    जून 12, 2024 AT 11:19

    अब्दुल्ला जैसे लोग तो हमेशा से राजनीति के लिए गांधी का नाम लेते रहे हैं। जब तक उनके बेटे का नाम भी फारूक है तो ये बात बरकरार रहेगी।

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    Sunil Mantri

    जून 13, 2024 AT 17:03

    गांधी के बारे में बहुत बात हो रही है पर कोई नहीं बता रहा कि उनके बाद क्या हुआ? जब तक हम अपने आप को बदलेंगे तब तक कुछ नहीं बदलेगा। ये सब बातें बस टाइम पास है।

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    harshita sondhiya

    जून 14, 2024 AT 06:33

    ये सब बकवास बंद करो! जो लोग गांधी के नाम पर देश को बांटने की कोशिश कर रहे हैं वो देशद्रोही हैं। मोदी जी को बिना किसी बहाने के गांधी के बारे में बात करने की जरूरत नहीं। उन्होंने जो किया है वो देखो।

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    Santosh Hyalij

    जून 14, 2024 AT 23:26

    गांधी के नाम पर राजनीति करना एक विचारधारा का अपराध है। उनकी विरासत को बचाने के लिए नहीं, बल्कि अपने राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। यह एक बुरा अभ्यास है।

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    Nidhi Singh Chauhan

    जून 16, 2024 AT 11:04

    गांधी को याद करना तो अच्छा है पर जब तक हम अपने घर में बाल्टी में बैठकर अपनी बेटी को शिक्षा नहीं देंगे तब तक गांधी के नाम पर बहस करना बेकार है।

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    Gayatri Ganoo

    जून 17, 2024 AT 00:38

    ये सब एक बड़ा षड्यंत्र है। गांधी के नाम पर अब्दुल्ला को बाहरी शक्तियां फंसा रही हैं। वो जानता है कि अगर वो गांधी का नाम लेगा तो लोग उसकी बात मान लेंगे। ये एक गुप्त राजनीतिक योजना है।

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