पीवी सिंधु ने पेरिस ओलंपिक की करारी हार के बाद छोटे ब्रेक का किया फैसला
पीवी सिंधु ने पेरिस ओलंपिक की करारी हार के बाद छोटे ब्रेक का किया फैसला
पीवी सिंधु, जिनका नाम आज के आधुनिक बैडमिंटन की दुनिया में समर्पण और सफलता का पर्याय है, ने पेरिस ओलंपिक 2024 में निराशाजनक हार के बाद एक छोटा सा ब्रेक लेने का निर्णय किया है। दो बार की ओलंपिक पदक विजेता सिंधु का ऐतिहासिक तीसरा ओलंपिक पदक जीतने का सपना चीन की हे बिंग जियाओ के खिलाफ महिला एकल प्री-क्वार्टरफाइनल में हार से टूट गया। सिंधु इस मैच में सीधे सेटों में 19-21, 14-21 से हार गईं।
सिंधु का समर्पण और संघर्ष
यह हार उनके लिए करारी थी, लेकिन सिंधु ने अपने करियर को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वह इंटरनेशनल बैडमिंटन में अपनी यात्रा को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं, हालांकि अब वह छोटे ब्रेक के बाद ही कोर्ट पर लौटेंगी। सिंधु ने अपने कठिन सफर और दो सालों की चोटों और लम्बे आराम के बारे में बात की। उन्होंने 2016 के रियो ओलंपिक में रजत पदक और 2020 के टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीते थे।
हर यात्रा महत्वपूर्ण
सिंधु ने अपनी हार को अपने करियर के सबसे कठिन पलों में से एक माना, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि वह अपने देश का प्रतिनिधित्व करते हुए गर्व महसूस करती हैं। उन्होंने कहा कि उनके शरीर और मन को ब्रेक की जरूरत है ताकि वह पूरी ऊर्जा के साथ लौट सकें। सिंधु ने बताया कि उनकी भविष्य की योजना स्पष्ट है: वह ब्रेक के बाद बैडमिंटन खेल में अपनी यात्रा जारी रखेंगी।
सिंधु की ताकत और आत्मविश्वास
यह छोटा ब्रेक सिंधु के लिए अपने खेल और जीवन के प्रति नई दृष्टिकोण विकसित करने का समय साबित हो सकता है। खेल के प्रति उनकी अविश्वसनीय प्रतिबद्धता और कठिनाइयों के बावजूद सफलता की चाह उन्हें दूसरों के लिए प्रेरणा बनाती है। सिंधु का यह फैसला बताता है कि कठिनाइयों के बावजूद, अपनी पसंदीदा चीजों की ओर लौटने की चाह और उससे मिलने वाली खुशी महत्वपूर्ण होती है।
पीछे की चुनौतियां और आगे की राहें
पीवी सिंधु की यात्रा हमेशा से ही कठिनाइयों और चुनौतियों से भरी रही है। उनके करियर की शुरुआत से ही, उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लिया और अपनी जगह बनाई। उनके करियर के दौरान, उन्होंने कई बार चोटों का सामना किया और अपनी फिटनेस पर काम किया। पेरिस ओलंपिक में उनकी हार एक झटका जरूर थी, लेकिन यह उन्हें अपने खेल से दूर नहीं कर सकती।
खेल और प्रतियोगिताओं से कुछ समय का ब्रेक लेकर वह अपनी मानसिक और शारीरिक स्थिति को सुधारेंगी। सिंधु का विश्वास और आत्म-प्रेरणा उन्हें एक बार फिर से कोर्ट पर देखने को तैयार करेगा। यह ब्रेक उनके लिए महत्वपूर्ण साबित होगा, एक बार फिर से ऊर्जा और आत्मविश्वास से लबरेज़ होकर अपनी यात्रा को पूरा करने के लिए।
विश्वस्तरीय करियर और भविष्य
पीवी सिंधु का करियर देश और दुनिया में एक प्रेरणा की तरह है। सिंधु की दो ओलंपिक पदक जीत ने भारतीय बैडमिंटन को एक नया मुकाम दिया है। उनकी खेल भावना, समर्पण और मेहनत अगले जनरेशन के खिलाड़ियों को लगातार प्रेरणा देती रहेगी। उनके अगले कदम की प्रतीक्षा पूरी खेल जगत कर रही है, और सभी को विश्वास है कि सिंधु आने वाले समय में और नई ऊंचाइयों को छुएंगी।
अंत में, यह कह सकते हैं कि पीवी सिंधु ने अपने करियर में जो ऊंचाइयाँ हासिल की हैं, वह असाधारण हैं। पेरिस ओलंपिक की हार से वह निराश जरूर हैं, लेकिन इससे उनका हौसला नहीं टूटेगा। वह एक योद्धा हैं, और इस छोटे ब्रेक के बाद एक बार फिर से अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देंगे। उनकी यह प्रेरणादायक यात्रा खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों के लिए एक मिसाल है।
Fatima Al-habibi
अगस्त 3, 2024 AT 17:46क्या ये ब्रेक वाकई जरूरी है? या फिर ये सिर्फ एक नियोजित रिसेट है जिसका इस्तेमाल ट्रॉफी के नीचे छुपे दर्द को ढकने के लिए किया जा रहा है?
मैं उनकी मेहनत की सराहना करती हूँ, लेकिन अब तक के सब पदक भी तो उन्होंने चोटों के बीच जीते हैं।
क्या अब शरीर के लिए ब्रेक नहीं, दिमाग के लिए ब्रेक चाहिए?
मैं उनकी बात समझती हूँ, लेकिन ये निर्णय बहुत टेढ़ा लग रहा है।
Nisha gupta
अगस्त 5, 2024 AT 05:58हर यात्रा में एक अंत होता है, लेकिन असली यात्रा तो उस अंत के बाद शुरू होती है।
पीवी सिंधु ने जो कुछ किया, वो किसी खिलाड़ी के लिए नहीं, बल्कि एक पूरी नस्ल के लिए एक नया मानक बना दिया।
वो अब बस एक खिलाड़ी नहीं, एक आइकॉन हैं।
उनका ब्रेक नहीं, एक नए अध्याय की शुरुआत है।
हमें उन्हें आराम करने देना चाहिए, न कि उनकी चुप्पी को असफलता का निशान बनाना।
Roshni Angom
अगस्त 6, 2024 AT 00:30मुझे लगता है... कि वो बस थक गई हैं...
और जब इतनी ऊर्जा लगातार दी जाती है...
तो शरीर भी बोल उठता है...
और दिमाग भी...
और दिल भी...
और उनके लिए ये ब्रेक बस एक शांति की जरूरत है...
और अगर ये शांति उन्हें वापस लाएगी...
तो ये ब्रेक उनके लिए सबसे बड़ी जीत होगी...
और हम सबके लिए एक नई उम्मीद...
और ये बस एक ब्रेक है...
न कि अंत...
और अगर वो वापस आएं...
तो वो न सिर्फ खेलेंगी...
बल्कि फिर से दुनिया को हैरान कर देंगी...
vicky palani
अगस्त 7, 2024 AT 07:35अरे भाई, ये ब्रेक क्या है? बस एक बहाना है न? अगर वो असली योद्धा होतीं तो चोट लगी होती तो भी मैच खेलतीं।
पेरिस में हार के बाद ब्रेक? ये तो बहुत नाजुक दिख रहा है।
अब तक के पदक भी तो जब बीमार थीं तो जीते थे।
अब लोग उन्हें बच्चों की तरह लुटाने लगे हैं।
ये खेल नहीं, नाटक हो गया है।
jijo joseph
अगस्त 8, 2024 AT 14:48लॉन्ग-टर्म एथलीट रिकवरी मॉडल के अनुसार, इंटरवल रिस्ट के बाद एथलेटिक परफॉर्मेंस में 18-22% की बेहतरी देखी गई है, खासकर जब एक्सट्रीम फिजिकल स्ट्रेस और कॉग्निटिव लोड का कॉम्बिनेशन हो।
सिंधु के केस में, लगातार 8 साल का इंटरनेशनल कैरियर, फिजियोथेरेपी रिकॉर्ड्स, और न्यूरोमस्कुलर फैटीग के डेटा से ये ब्रेक न सिर्फ जरूरी है, बल्कि स्ट्रैटेजिकली ऑप्टिमल है।
इसे एक रिट्रीट नहीं, एक डायनेमिक रिस्टोरेशन प्रोसेस मानना चाहिए।
Manvika Gupta
अगस्त 10, 2024 AT 10:42मैं रो रही हूँ...
उन्हें देखकर...
मैं भी तो बहुत थक गई हूँ...
क्या कोई मुझे समझता है...
मैं भी तो इतना लड़ रही हूँ...
लेकिन कोई नहीं देख रहा...
मैं भी ब्रेक लेना चाहती हूँ...
क्या मैं भी एक दिन इतनी मशहूर हो सकती हूँ...
या फिर मैं बस एक और आम इंसान हूँ...
leo kaesar
अगस्त 10, 2024 AT 14:20ब्रेक ले ली। अब जाकर शादी कर ले।
क्या तुम्हारे पास अब दूसरा प्लान है?
क्या तुम्हारे पास अब दूसरा नाम है?
बैडमिंटन नहीं तो फिल्म बनाना शुरू कर दो।
मैंने देखा है, बहुत लोग अपने नाम के साथ बिक्री करते हैं।
तुम्हारा नाम तो बहुत बड़ा है।
अब इसे बेचो।
ब्रेक नहीं, बिजनेस शुरू करो।
Ajay Chauhan
अगस्त 12, 2024 AT 06:55ये ब्रेक लेना तो बहुत आसान है।
जब तुम्हारे पास 10 करोड़ की फैन बेस है, 50 एंडोर्समेंट्स हैं, और तुम्हारे नाम के साथ एक ब्रांड बन गया है...
तो ब्रेक लेना बस एक लक्जरी है।
मैं जब 12 घंटे रोज काम करता हूँ और 3000 रुपये में गुजारा करता हूँ, तो मुझे ब्रेक कहाँ मिलेगा?
तुम्हारी यात्रा तो एक बॉलीवुड मूवी है।
हम तो डॉक्यूमेंट्री देख रहे हैं।
Gayatri Ganoo
अगस्त 12, 2024 AT 07:23ये ब्रेक किसी ने डिज़ाइन किया है...
शायद बैडमिंटन एसोसिएशन...
या फिर वो लोग जो टीवी पर बात करते हैं...
या शायद चीन की टीम...
क्योंकि अगर वो वापस आएंगी तो अगली बार जीत जाएंगी...
और फिर चीन का एक्सपोर्ट बाधित होगा...
ये सब एक रणनीति है...
और हम सब बस उसके लिए तैयार हो रहे हैं...
तुम्हें ये नहीं लगता कि ये बहुत बड़ा नाटक है?
harshita sondhiya
अगस्त 12, 2024 AT 11:08ये ब्रेक एक शर्म की बात है! जब तक तुम भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हो, तुम्हारा शरीर तुम्हारा नहीं है! ये तो देश का है! तुम्हारी हार ने हमें शर्मिंदा कर दिया! तुम नहीं रुक सकतीं! तुम्हें वापस आना ही होगा! नहीं तो तुम एक धोखेबाज हो!
Balakrishnan Parasuraman
अगस्त 14, 2024 AT 00:34ये ब्रेक लेने का फैसला भारत के लिए शर्म की बात है। हम जिस तरह से खेलते हैं, उसका नाम भारतीय गर्व है। जब तक जीवन है, तब तक खेलो। जब तक दिल धड़कता है, तब तक लड़ो। ये ब्रेक लेना एक शरणार्थी का व्यवहार है। भारत के लिए ये नाम नहीं, ये नाम है अपराध। अगर तुम रुक गईं तो तुम भारत के लिए नहीं, बल्कि अपने भय के लिए रुक गईं।