Supreme Court में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के 20 महत्वपूर्ण फैसले: न्याय की नयी दिशा

Supreme Court में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के 20 महत्वपूर्ण फैसले: न्याय की नयी दिशा

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़: भारतीय न्यायपालिका के प्रमुख स्तंभ

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने 10 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्ति ली। अपने कार्यकाल के दौरान, वह एक ऐसे न्यायाधीश के रूप में उभरे जिन्होंने संविधान के मूल्यों और मानवाधिकारों की सर्वोच्चता सुनिश्चित की। उनके फैसले न केवल कानूनी, बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी अतिसंवेदनशील माने गए हैं। वह ऐसे मुद्दों पर पैरवी करते रहे, जो समाज के सामान्य जनमानस के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण थे।

गोपनीयता का अधिकार: एक नया दृष्टिकोण

जस्टिस चंद्रचूड़ के कार्यकाल में सबसे चर्चित फैसलों में से एक था 'गोपनीयता का अधिकार'। 'जस्टिस (सेवानिवृत्त) केएस पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ और अन्य' के मामले में उन्होंने निर्णय दिया कि अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का अधिकार गरिमा सहित जीने का अधिकार शामिल है। इस फैसले ने व्यक्तिगत गोपनीयता और मानवाधिकारों की सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रेस की स्वतंत्रता का समर्थन

मीडिया की स्वतंत्रता हमेशा न्यायपालिका के सामने एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। जस्टिस चंद्रचूड़ के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट ने 'मध्यमा ब्रॉडकास्टिंग लिमिटेड बनाम भारत संघ व अन्य' के मामले में केंद्र सरकार के उस निर्णय को रद्द कर दिया, जिसमें मलयालम समाचार चैनल 'मीडिया वन' का प्रसारण लाइसेंस रद्द कर दिया गया था। उन्होंने प्रेस की स्वतंत्रता को राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर अनावश्यक रोक से बचाया।

महिला अधिकार और जेंडर जस्टिस

महिला अधिकार की सुनिश्चितता का समर्थन करते हुए, जस्टिस चंद्रचूड़ ने महिलाओं को समानता का अधिकार दिलाने में महत्वपूर्ण न्यायिक सुधारों का समर्थन किया है। उन्होंने उन प्रथाओं के खिलाफ निर्णय दिए, जो महिला समानता के अधिकार को क्षति पहुँचाते थे, और न्यायपालिका के माध्यम से लैंगिक न्याय की दिशा में अग्रसर रहे।

न्यायिक दृष्टिकोण का विकास और समर्पण

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस चंद्रचूड़ के आठ वर्षीय कार्यकाल में उन्होंने 600 से अधिक निर्णयों की अध्यक्षता की और इनका हिस्सा बने। उनका दृष्टिकोण हमेशा से स्वतंत्र और निष्पक्ष रहा है। उन्होंने स्वतंत्र जांच, संवैधानिक स्वतंत्रता, और कानूनी संवेदनशीलता से संबंधित मामलों पर बहुतेरी बार अपनी स्पष्ट राय व्यक्त की।

उनकी विरासत भारतीय न्यायपालिका के लिए सतत प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। उनके विचार और रास्ते आने वाले मुख्य न्यायाधीशों को भी प्रेरित करेंगे। उनके 20 महत्वपूर्ण फैसले भारतीय न्यायपालिका के नियमों एवं कार्यप्रणाली में नयी ऊर्जा का संचार करते हैं।

10 टिप्पणि

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    Liny Chandran Koonakkanpully

    नवंबर 11, 2024 AT 20:03
    जस्टिस चंद्रचूड़ ने तो सिर्फ फैसले नहीं, बल्कि दिलों को छू लिया! 🙌 गोपनीयता का अधिकार? ये तो अब हर भारतीय का जन्मसिद्ध अधिकार है! बस अब सरकार भी इसे समझे!
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    avinash jedia

    नवंबर 13, 2024 AT 08:24
    अरे यार, ये सब बकवास है। असल में सब कुछ पार्टी पॉलिटिक्स पर टिका हुआ है। न्याय की बात करना बस धुंधला धोखा है।
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    Shruti Singh

    नवंबर 13, 2024 AT 08:25
    अगर तुम इस तरह के फैसलों को नहीं मानते, तो तुम सिर्फ अपने भय को बचा रहे हो। न्याय का रास्ता आसान नहीं होता, लेकिन ये जरूरी है।
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    Manu Metan Lian

    नवंबर 14, 2024 AT 13:33
    मैं जिस न्यायाधीश के बारे में बात कर रहा हूँ, वह न केवल एक न्यायाधीश थे, बल्कि एक दार्शनिक थे। उनके फैसलों में न्याय के बारे में एक गहरी दर्शनिक आधार था, जो केवल लिखित कानूनों तक सीमित नहीं था, बल्कि मानवीय संवेदना और सामाजिक न्याय के अमूर्त सिद्धांतों तक फैला हुआ था। उन्होंने न्याय को एक जीवंत, गतिशील और निरंतर विकसित होने वाली प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया, जो संविधान के अक्षरों से परे उसके आत्मा को जीवित रखता है।
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    Kunal Sharma

    नवंबर 15, 2024 AT 06:24
    क्या आप जानते हैं कि जब चंद्रचूड़ ने गोपनीयता के मामले में अपनी राय दी थी, तो उनके विरोधी न्यायाधीशों ने उन्हें एक अतिशयोक्ति कहा था? लेकिन आज जब हम डिजिटल निगरानी, एआई ट्रैकिंग, और सरकारी डेटा एकत्रीकरण की बात करते हैं, तो ये फैसला एक भविष्यवाणी जैसा लगता है। ये न्याय नहीं, ये भविष्य की आँखें थीं।
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    Payal Singh

    नवंबर 15, 2024 AT 14:24
    हमें याद रखना चाहिए कि जब कोई न्यायाधीश अपने फैसले में एक गरीब महिला की आवाज़ को सुनता है, तो वह सिर्फ कानून नहीं, बल्कि इंसानियत की आवाज़ सुन रहा होता है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने इसी को अपनी जिंदगी का आधार बनाया।
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    Raksha Kalwar

    नवंबर 17, 2024 AT 01:15
    इस तरह के न्यायाधीशों के लिए श्रद्धांजलि। उन्होंने न्याय को एक शब्द नहीं, एक जीवन शैली बना दिया।
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    himanshu shaw

    नवंबर 17, 2024 AT 09:58
    अरे यार, ये सब बस एक बड़ा धोखा है। जब तक सरकार अपने अधिकारों को नहीं छोड़ेगी, तब तक कोई न्याय नहीं होगा। ये सब बस एक नाटक है।
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    Rashmi Primlani

    नवंबर 18, 2024 AT 00:53
    जस्टिस चंद्रचूड़ ने न्याय को एक जीवित विरासत बनाया। उनके फैसले ने न केवल कानून को बदला, बल्कि सोच को भी। उनकी विरासत अब हम सबकी जिम्मेदारी है - इसे बरकरार रखना, इसे आगे बढ़ाना।
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    Anupam Sharma

    नवंबर 19, 2024 AT 13:41
    ok so u all are like wow so great but what about the 1000 cases he didn't touch? like the dalit land rights? the tribal displacement? the caste based discrimination in courts? he was just playing safe. real justice is messy. this is just... nice headlines.

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